
माँ, अब मैं भी सुन सकती हूँ
जुड़वाँ बहनें, एक कॉकलियर इम्प्लांट, और सुनना सीखना
केंद्र: श्रवण यात्रा
यह कहानी जुड़वाँ बहनों सिया और पिया की है। सिया सुन सकती है, जबकि पिया गंभीर श्रवण हानि के साथ जन्म लेती है। पिया के भविष्य को लेकर चिंतित परिवार पेशेवर मार्गदर्शन लेता है और कॉकलियर इम्प्लांट चुनता है। निरंतर थेरेपी, परिवार की भागीदारी और रोज़मर्रा के श्रवण अनुभवों के माध्यम से पिया धीरे-धीरे अपने आसपास की ध्वनियाँ पहचानना सीखती है।
यह पुस्तक किसमें मदद करती है
- श्रवण हानि और कॉकलियर इम्प्लांट के प्रति जागरूकता
- निदान से हस्तक्षेप तक श्रवण यात्रा की समझ
- श्रवण और सुनने के कौशल का विकास
- ध्वनि का पता लगाना और पहचानना
- श्रवण स्मृति और ध्यान
- प्रारंभिक वाक् और भाषा विकास
- माता-पिता और बच्चे की बातचीत और पारिवारिक भागीदारी
- निरंतर श्रवण अभ्यास और थेरेपी के लिए प्रेरणा
- भावनात्मक जुड़ाव और संवाद में आत्मविश्वास
₹160
ऑर्डर पर छपाई कर पूरे भारत में भेजी जाती हैं, प्रत्येक ऑर्डर पर ₹100 का निश्चित डिलीवरी शुल्क लागू होता है। डिस्पैच में कुछ दिन लग सकते हैं।
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